कितनी बात छिपी हुई हैं, इस दिल की गहराई में,
तुम आओ तो बात करें हम, मिलकर इस तन्हाई में,
मौसम कितने बीत गए हैं, जिसका कोई हिसाब नहीं,
तुमको कितने खत हैं लिखे, पर इक का भी जवाब नहीं,
अपना हाल कहें अब किससे, याद भरी पुरवाई में,
तुम आओ तो बात करें हम, मिलकर इस तन्हाई में,
दिन काटे अब कटते नहीं हैं, रातें डसती रहती हैं,
इक बैचेनी सी हैं मन में, जिंदगी बोझिल लगती हैं,
तू ही तू याद है मुझको, देखूं तुझे परछाई में,
तुम आओ तो बात करें हम, मिलकर इस तन्हाई में,
बंधन सारे तोड़ के तुम, आ जाओ बस इस पल में,
देखे थे जो ख़्वाब हमने, बदले उसे हकीकत में,
सारे गुनाह अब मेरे सिर पर, क्या रखा है जुदाई में,
तुम आओ तो बात करें हम, मिलकर इस तन्हाई में,